अहा के बिछैल साजिस के जाल देख के
अहा के बिछैल साजिस के जाल देख के ,
हम बहुत हैरान छि जान अहा के इ कमाल देख के |
हाम्रा उजाडे से पहिले कैनका त इ सोचले रैहती ,
कि कातेक कानतै हमर माइ ,हमर इ हाल देख के ||
Labels: Maithali Sayari
समाज में व्यक्ति जीवन प्रति जो धारणा बनाता है या धारणा करता है वही धर्म है। धर्म संस्कृत के ''धृ'' धातु से बना है जिसका अर्थ है जो धारण किया जाये। जब क्या धारण किया जाये स्पष्ट हो जाये तो वह धर्म बन जाता है। धर्म एक प्रकार से कर्यव्य के द्वारा कुछ समाजोपयोगी तथा आत्मोपयेगी बातों या गुणों को धारण करना कहा जा सकता है।
अहा के बिछैल साजिस के जाल देख के ,
हम बहुत हैरान छि जान अहा के इ कमाल देख के |
हाम्रा उजाडे से पहिले कैनका त इ सोचले रैहती ,
कि कातेक कानतै हमर माइ ,हमर इ हाल देख के ||
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| Bipin-P |
Labels: Maithali Sayari, मैथली सायरी
सुन नै सकी छि बुराइ आहाके ,
हरपल चाहि छि भलाइ अहाके !
हस्ते हस्ते खैस परिय आँख स नोर ,
एन क सहि छि जुदाई अहाके !!
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